उत्तर नारी डेस्क
देहरादून के बसंत विहार थाना क्षेत्र अंतर्गत ऋषि विहार में सामने आए नवजात शिशु को छत पर छोड़ने के मामले में पुलिस जांच के बाद एक बेहद मार्मिक और दर्दनाक कहानी उजागर हुई है। इस घटना ने न केवल पुलिसकर्मियों, बल्कि इसे जानने वाले हर शख्स की आंखें नम कर दी हैं।
पुलिस ने जांच के दौरान नवजात की मां को खोज निकाला है। युवती अविवाहित है और जिस युवक से उसकी सगाई हुई थी, उसी से वह गर्भवती हुई थी। बताया गया कि करीब डेढ़ साल पहले दोनों का रिश्ता तय हुआ था। सगाई के बाद दोनों के बीच मेल-जोल बढ़ा और उनके बीच संबंध बने। लेकिन शादी से कुछ ही समय पहले नियति ने ऐसा वार किया कि हरिद्वार में एक सड़क दुर्घटना में युवक की मौत हो गई।
इस हादसे ने युवती को मानसिक रूप से तोड़कर रख दिया। गहरे सदमे और अवसाद की स्थिति में वह अपनी शारीरिक हालत और गर्भावस्था पर ध्यान नहीं दे सकी। सामाजिक बदनामी और लोकलाज के भय ने उसे भीतर से घेर लिया और वह किसी से मदद मांगने का साहस भी नहीं जुटा पाई।
घटना वाले दिन युवती ने अपने घर के बाथरूम में ही बच्चे को जन्म दिया। मंगेतर की मौत का गम और समाज के डर ने उसे इस कदर डरा दिया कि वह सही निर्णय नहीं ले सकी। घबराहट और असहायता की हालत में उसने नवजात को एक कट्टे में डालकर मकान की छत पर छोड़ दिया। कुछ समय बाद बच्चे के रोने की आवाज सुनकर पड़ोसियों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। समय रहते पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से नवजात की जान बचा ली गई।
एसएसआई दुर्गेश कोठियाल ने बताया कि नवजात को लावारिस छोड़ने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन पूरे घटनाक्रम और युवती की मानसिक स्थिति को देखते हुए पुलिस मानवीय दृष्टिकोण अपना रही है। युवती और उसके परिजन अब बच्चे को स्वीकार करने और उसकी परवरिश के लिए तैयार हैं।
दून अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार नवजात की हालत फिलहाल सामान्य है और वह पूरी तरह सुरक्षित है। पुलिस और अस्पताल प्रशासन की आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद मासूम को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
यह घटना समाज के उस दबाव और डर की ओर भी इशारा करती है, जिसमें कई बार इंसान गलत फैसले लेने पर मजबूर हो जाता है—और यह याद दिलाती है कि ऐसे समय में संवेदनशीलता और सहारे की कितनी जरूरत होती है।
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