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पहाड़ की बेटियों का कमाल, दो बनीं फोटोग्राफर, एक वायुसेना में अफसर

 उत्तर नारी डेस्क


बेटियां किसी से कम नहीं होतीं—यह पंक्ति आज केवल एक नारा नहीं, बल्कि हकीकत बन चुकी है। आज की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। जब बेटियां आगे बढ़कर अपने परिवार, समाज, प्रदेश और देश का नाम रोशन करती हैं, तो वे केवल सफलता नहीं पातीं। वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाती हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है देवप्रयाग नगर के निकट तुणगी गांव के जियाल परिवार की।


लॉकडाउन से शुरू हुआ सपनों का सफर

तुणगी गांव की दो सगी बहनें — मानसी जियाल और दिव्यांशी जियाल — आज प्रोफेशनल फोटोग्राफी और वेडिंग शूट के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। विवाह समारोह हो या कोई विशेष आयोजन, दोनों बहनें अपनी रचनात्मक दृष्टि और तकनीकी कुशलता से हर पल को यादगार बना देती हैं।

उनका यह सफर आसान नहीं था। कोरोना लॉकडाउन के कठिन समय में, जब अधिकांश लोग अनिश्चितता से जूझ रहे थे, तब मानसी और दिव्यांशी ने चुनौतियों को अवसर में बदलने का निर्णय लिया। सीमित संसाधन, सामाजिक धारणाएं और पहाड़ की भौगोलिक चुनौतियां। इन सबके बावजूद उन्होंने कैमरे को अपना साथी बनाया और अपने सपनों को आकार देना शुरू किया।

वे फोटोग्राफी को केवल पेशा नहीं, बल्कि अपनी कला की अभिव्यक्ति मानती हैं। उनका कहना है कि जब वे किसी दुल्हन की मुस्कान, परिवार की भावनाएं या किसी समारोह की खुशियां कैमरे में कैद करती हैं, तो उन्हें लगता है कि वे लोगों की जिंदगी के सबसे खास पलों का हिस्सा बन रही हैं।

उनका स्पष्ट संदेश है — “अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता।”


बड़ी बहन ने चुना देशसेवा का मार्ग

जियाल परिवार की उपलब्धियां यहीं तक सीमित नहीं हैं। इसी वर्ष परिवार के लिए गर्व का एक और क्षण आया, जब बड़ी बहन प्रियांशी जियाल का चयन भारतीय वायुसेना में ग्राउंड ड्यूटी ऑफिसर के पद पर हुआ। यह केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पहाड़ की बेटियों की सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रतीक है।


पिता का गर्व, समाज के लिए प्रेरणा

बेटियों की इस उपलब्धि ने पिता नेत्र सिंह जियाल का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। एक समय जो समाज बेटियों को सीमित दायरे में देखता था, आज वही समाज उनकी उपलब्धियों पर तालियां बजा रहा है। जियाल परिवार की तीनों बेटियां यह साबित करती हैं कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। जरूरत होती है तो बस विश्वास, मेहनत और हौसले की।

आज ये बेटियां न केवल अपने परिवार की शान हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं — यह संदेश देते हुए कि पहाड़ की बेटियां भी आसमान छू सकती हैं।

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