उत्तर नारी डेस्क
उत्तराखण्ड शासन ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए महत्वपूर्ण पदों पर तैनात वरिष्ठ अधिकारियों को समय से पहले ही पदमुक्त कर दिया है। इस निर्णय के तहत ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार और जलविद्युत निगम के प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल को उनकी सेवा विस्तार अवधि पूरी होने से लगभग साढ़े तीन माह पहले ही हटा दिया गया।
गौरतलब है कि दोनों अधिकारियों को 30 जून 2024 से अधिवर्षता आयु के बाद दो-दो वर्ष का सेवा विस्तार प्रदान किया गया था। इसके बावजूद, कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही शासन ने यह अहम निर्णय लेते हुए उन्हें उनके पदों से मुक्त कर दिया।
इसके साथ ही ऊर्जा निगम में अन्य स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। निगम के निदेशक (परिचालन) अजय अग्रवाल और निदेशक (परियोजना) अजय कुमार अग्रवाल को भी तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया गया है। इस व्यापक फेरबदल को ऊर्जा विभाग में प्रशासनिक पुनर्संरचना के रूप में देखा जा रहा है।
ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने मंगलवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए। आदेश के तहत जलविद्युत निगम में यमुना वैली-प्रथम (डाकपत्थर) के महाप्रबंधक गजेंद्र सिंह बुदियाल को ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
वहीं, जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक का दायित्व अब भागीरथी वैली के महाप्रबंधक अजय कुमार सिंह को सौंपा गया है। उल्लेखनीय है कि अजय कुमार सिंह पहले से ही निगम में निदेशक (परिचालन) का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं।
इस अचानक लिए गए फैसले को शासन की रणनीतिक प्रशासनिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र के कार्यों में तेजी और बेहतर समन्वय लाने की उम्मीद जताई जा रही है।
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