उत्तर नारी डेस्क
बताते चलें की, समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रदेेश में कक्षा एक से आठवीं तक के सरकारी और अशासकीय स्कूलों के बच्चों को हर साल निशुल्क ड्रेस दी जाती है। स्कूल ड्रेस पर खर्च होने वाली कुल धनराशि का 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है और शेष दस फीसदी धनराशि राज्य सरकार वहन करनी है। जबकि वर्तमान शिक्षा सत्र 2020-21 खत्म होने वाला है और तीन महीने बाद नया शिक्षा सत्र शुरू हो जाएगा। इसके बावजूद ना तो बच्चों को ड्रेस मिल पायी है और ना ही इसके लिए उन्हें कोई पैसे दिए गए।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक स्कूल ड्रेस के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत 35 करोड़ से अधिक की धनराशि जिलों को जारी की जा चुकी है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब तक छात्र-छात्राओं को न तो स्कूल ड्रेस दी गई और न ही इसके लिए धनराशि दी गई। विभागीय सूत्रों के मुताबिक शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे चाहते हैं कि बच्चों को दी जानी वाली स्कूल ड्रेस किसी फर्म के माध्यम से दी जाए। इसके लिए विभाग में टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाए। यही वजह है कि इस बार अब तक प्रदेश के लाखों बच्चों को स्कूल ड्रेस नहीं मिल पाई है।
आपको बता दें, की नियमों के मुताबिक अप्रैल व मई 2020 तक बच्चों को स्कूल ड्रेस मिल जाती थी। परन्तु इस बार कोविड-19 के चलते नौ महीने तक स्कूल बंद रहे, फ़िर भी मिड डे मील एवं अन्य योजनाओं की तरह बच्चों को स्कूल ड्रेस या इस मद में उनके खातों में धनराशि दी जा सकती थी। हालांकि बच्चों को इसके लिए ना तो ड्रेस मिली ना ही पैसा मिला जिसके लिए पूरे साल बच्चे इंतजार करते रह गए।
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