उत्तर नारी डेस्क 

कोरोनाकाल में आजकल जिस प्रकार के हालत बन रखे हैं उसमें हजारों युवा नौकरी से हाथ धो बैठे हैं और गाँव की ओर वापस रुख कर चुके हैं। ऐसे में उनके सामने स्वरोज़गार एक अच्छे विकल्प के तौर पर साबित हो सकता है। आज स्वरोज़गार की ऐसी ही अनोख़ी कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं। जिन्होंने स्वरोज़गार अपनाकर ओरो को भी प्रेरित किया है। आपको बता दें कि इन दिनों सोशल मीडिया पर एक फोटो खूब वायरल हो रही है। जिसमें कांडपाल हैयर सैलून के बारे में बात हो रही है और हर कोई उनकी जमकर तारीफ कर रहा है। आज हम आपको बतायेंगेे आखिर कौन है कांडपाल सैलून को चलाने वाला शख्स…..

आपको बता दें कि 28 वर्षीय विनोद कांडपाल मूलरूप से अल्मोड़ा जिले के रहनेे वालेे है। कई सालों से हल्द्वानी में रह रहे है। बचपन सेे ही गरीबी में पले-बढ़े विनोद ने काफी संघर्ष केे बाद एक बेहतर जीवन की कल्पना की थी लेेकिन कोरोना ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। 

कहते हैं कि परिश्रम के चूल्हे में डाला हुआ व्यक्ति सोना होकर ही बाहर निकलता है, इसी तरह विनोद कांडपाल भी लॉकडाउन से पहले दिल्ली में काम करते थे। लेकिन पूरे देश में लॉकडाउन लग जाने से उनकी नौकरी में संकट आ गया था जिसके बाद वो वापस अपने शहर हल्द्वानी आ गए। वहीं विनोद के उपर घर की जिम्मेदारी थी जिससे वह भाग नहीं सकते थे। ऐसे में उन्होंने सैलून खोलने का मन बनाया। सैलून खोलते ही उनकी दुकान में लोग आने लगे, जिससे उनका आत्मविश्वास और बढ़ गया। विनोद कांडपाल का कहना है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है। जिस काम से आप घर चला सकते हो, उसका हर वक्त आदर होना चाहिए। वहीं, उन्होंने युवाओं को खुद का कोई भी छोटा-मोटा व्यवसाय करने की सलाह दी।