उत्तर नारी डेस्क
उत्तराखण्ड में आने वाले 14 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। इसके नतीजे 10 मार्च को आएंगे। जिसको देखते हुए उत्तराखण्ड में चुनावी सरगर्मियां जोरों पर हैं, चुनाव जीतने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। साथ ही वोटरों को रिझाने के लिए सभी राजनीतिक दल एड़ी से चोटी तक जोर आजमाइश कर रही हैं। राज्य में बीचेपी सत्ता में रहने के लिए दिन रात एक किए हुए तो कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी भी चुनाव प्रचार में पीछे नहीं है। वहीं अब राजनीतिक दल चुनावी रण में जीत हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। शायद यही कारण है की उत्तराखण्ड का चुनावी रण प्रत्याशियों की परीक्षा लेने लगा है। भारी बारिश-बर्फबारी के चलते जहां नेताओं के लिए दूरदराज के गांवों तक पहुंच पाना संभव नहीं हो रहा, तो वहीं कई जगह नेताओं को जनता से मिलने के लिए जंगल-जंगल नापने पड़ रहे हैं। अब जंगल से गुजर रहे हैं तो जानवरों की शांति में खलल डालने की कीमत भी चुकानी ही पड़ेगी। इस बात को कालाढूंगी के बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी सुंदरलाल आर्य से बेहतर भला कौन समझ सकता है।
बता दें, नैनीताल के कालाढूंगी विधानसभा सीट पर बसपा के प्रत्याशी सुंदरलाल आर्य शनिवार को प्रचार-प्रसार करने के लिए अपने समर्थकों के साथ निकले थे तभी कोटाबाग इलाके में हाथियों का झुंड सड़क पर खड़ा था। गाड़ियों को देखकर हाथी उग्र हो गया और सुंदरलाल आर्य के काफिले के पीछे भागने लगा। हाथी को अपनी कार की तरफ आता देख सबकी सांसें अटक गईं। हालांकि कुछ दूर दौड़ाने के बाद हाथी दूसरी तरफ भाग निकले। तब जाकर नेता जी और उनके समर्थकों की जान में जान आई। राहत वाली बात ये है कि किसी तरह की अनहोनी नहीं हुई।
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