उत्तर नारी डेस्क
हरिद्वार : उत्तराखण्ड संस्कृत विवि में शनिवार को न्यूरो योगा एंड कॉन्शसनेस स्टडी विषय पर 12वीं अंतर्राष्ट्रीय योग कांफ्रेंस आयोजित की गई। कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने कहा कि चेतना आज भी विज्ञान के लिए कठिन समस्या बनी हुई हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में शरीर और मस्तिष्क को तो समझ लिया गया है। लेकिन अनुभव करना यानी जो उसको फील करता है वह कौन है। उन्होंने बताया कि यहीं पर हमारा भारतीय योग अपनी महत्वता सिद्ध करता है। उपनिषदों का ज्ञान और पतंजलि का अष्टम योग हमारे मस्तिष्क की सीमाओं के पार शुद्ध चेतना तक ले जाने का मार्ग दिखाता है। जिसे विज्ञान अब क्वांटम फिजिक्स के चश्मे से भी देखने की कोशिश कर रहा है।
मुख्य अतिथि अंतरविश्वविद्यालय योग शिक्षण केंद्र नई दिल्ली के निर्देशक प्रो. अविनाश पांडे निदेशक ने कहा योग के क्षेत्र में हो रहे शोध को अत्यधिक उत्कृष्ट बनाने की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि रघुनाथ कीर्ति कैंपस केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय देवप्रयाग के निर्देशक प्रो पीवीबी सुब्रमण्यम निर्देशक ने विश्वविद्यालय में आयोजित योग संगोष्ठी को छात्रों शोधार्थियों के लिए उपयोगी बताया और आगे भी ऐसे आयोजन के अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए योग विभाग के आचार्य को बधाई दी। कॉन्फ्रेंस के संयोजक डॉ. कामाख्या कुमार ने इस संगोष्ठी की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का योग विभाग अपने सीमित संसाधनों से उत्कृष्ट परिणाम देने का प्रयास कर रहा है। इस संगोष्ठी में अमरीका यूके, जापान चाइना सहित 15 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
योगा हैबिटैट शिकागो के साथ विश्वविद्यालय ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। संगोष्ठी में शिकागो से पधारे डॉ. दीप्ति सूरी ने अपने विचार रखे। संचालन प्रो. लक्ष्मी नारायण जोशी ने किया। इस अवसर पर प्रो. दिनेश चंद्र चमोला, प्रो. मोहन चंद्र बलोदी, प्रो. रामरत्न खंडेलवाल, डॉ. प्रकाश पंत, डॉ. हरीश तिवारी, डॉ. अनूप बहुखंडी, डॉ. ललित शर्मा, मनोज गहतोड़ी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक कर्मचारी और छात्र मौजूद रहे।
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