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कोटद्वार: चिटफंड ठगी का खुलासा, बोहरा कंपनी के गिरोह का एक और सदस्य गिरफ्तार

उत्तर नारी डेस्क 

दिनांक 05 सितंबर 2024 को वादिनी यास्मीन (निवासी कोटद्वार) द्वारा कोतवाली कोटद्वार में एक लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई। शिकायत में बताया गया कि उन्होंने सितंबर 2023 से सितंबर 2024 तक “बोहरा कंपनी” में एक वर्ष की निवेश योजना के तहत ₹100 प्रतिदिन जमा किए, जो कुल मिलाकर ₹36,500 हुए।

यह निवेश कंपनी के डायरेक्टर भीम सिंह के कहने पर किया गया था, जिसमें अवधि पूर्ण होने पर मूलधन के साथ ब्याज लौटाने का आश्वासन दिया गया था। किन्तु, निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद न तो धनराशि लौटाई गई और न ही कोई संतोषजनक उत्तर दिया गया। बाद में कंपनी का कार्यालय बंद पाया गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि यह एक सुनियोजित धोखाधड़ी थी।

मुकदमा पंजीकरण एवं जांच
प्राप्त शिकायत के आधार पर कोतवाली कोटद्वार में
मु0अ0सं0– 228/24, धारा 318(4) BNS के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

जांच के दौरान पुलिस द्वारा:
बैंक खातों का विश्लेषण
तकनीकी साक्ष्यों का संकलन
गहन पूछताछ एवं सुरागसी-पतारसी

की गई, जिससे यह तथ्य सामने आया कि अभियुक्तों द्वारा “बोहरा ग्रामीण विकास निधि लिमिटेड” नामक कंपनी संचालित कर अनेक लोगों से धनराशि जमा कराकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्न धाराओं की वृद्धि की गई:

धारा 3(5), 61(2), 336(3), 338, 340(2) BNS
धारा 3 एवं 21(3) बड्स एक्ट
अभियुक्तों की गिरफ्तारी

इस प्रकरण में:
मुख्य अभियुक्त दिलीप सिंह बोहरा
सह-अभियुक्त भीम सिंह, बालकरण, सुरेंद्र सिंह नेगी, सूरजमनी सेमवाल

को पूर्व में गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है।

वहीं, एक अन्य अभियुक्त प्यारेराम (उम्र 50 वर्ष) पुत्र छोटेराम, निवासी माजरी लालतप्पड़, डोईवाला (देहरादून), लगातार फरार चल रहा था और गिरफ्तारी से बचने हेतु अपने ठिकाने बदल रहा था।

उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने हेतु उस पर ₹2500 का इनाम घोषित किया गया।

पुलिस की विशेष कार्रवाई

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी के निर्देशानुसार, आर्थिक अपराधों को गंभीरता से लेते हुए फरार अभियुक्त की शीघ्र गिरफ्तारी हेतु विशेष टीम गठित की गई।

यह टीम:

अपर पुलिस अधीक्षक कोटद्वार मनोज कुमार ठाकुर
क्षेत्राधिकारी कोटद्वार निहारिका सेमवाल
के पर्यवेक्षण में तथा
प्रभारी निरीक्षक प्रदीप नेगी के नेतृत्व में कार्यरत रही।

टीम द्वारा:

सर्विलांस
तकनीकी विश्लेषण
विभिन्न संभावित स्थानों पर दबिश

जैसी रणनीतियों का उपयोग किया गया।
लगातार प्रयासों और सटीक सूचना के आधार पर अभियुक्त प्यारेराम को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया।

वर्तमान स्थिति
गिरफ्तार अभियुक्त को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।

निष्कर्ष
यह प्रकरण दर्शाता है कि किस प्रकार संगठित गिरोह आम जनता को छोटे-छोटे निवेश के लालच में फंसाकर बड़ी धनराशि की ठगी करते हैं। पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच के माध्यम से ऐसे गिरोहों का पर्दाफाश किया जा रहा है।

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