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चारधाम यात्रा मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन हेतु नई एसओपी लागू, पशु कल्याण और सुरक्षा पर सख्ती

उत्तर नारी डेस्क 

राज्य सरकार द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने तथा यात्रा मार्गों पर अश्ववंशीय पशुओं के कल्याण एवं संरक्षण के उद्देश्य से श्री केदारनाथ, श्री यमुनोत्री, श्री हेमकुंट साहिब एवं आदि कैलाश यात्रा मार्गों पर अश्ववंशीय पशुओं (घोड़ा-खच्चर आदि) के संचालन हेतु नवीन मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है। यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अधिकतम 5000 अश्ववंशीय पशुओं, हेमकुंट साहिब यात्रा मार्ग पर लगभग 1050 तथा यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर लगभग 595 पशुओं के संचालन की अनुमति होगी।

इसके तहत यात्रा मार्गों पर संचालित होने वाले सभी अश्ववंशीय पशुओं का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण से पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण, ग्लैंडर्स जांच, इयर टैगिंग एवं माइक्रोचिपिंग अनिवार्य होगी। स्वास्थ्य प्रमाणपत्र की वैधता 45 दिन होगी, जिसके पश्चात पुनः परीक्षण आवश्यक होगा। 

पशु कल्याण को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक एक किलोमीटर पर पशु स्वामी द्वारा स्वच्छ एवं गुनगुने पेयजल की व्यवस्था, चारा एवं इलेक्ट्रोलाइट उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। 

नई एसओपी में पशुओं पर अधिक भार लादने, घायल अथवा बीमार पशुओं से कार्य लेने, बिना टोकन संचालन, पशुओं को पीटने, तेज गति से दौड़ाने तथा ईयर टैग अथवा माइक्रोचिप से छेड़छाड़ जैसी गतिविधियों को पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 एवं भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर संबंधित पशुस्वामी का लाइसेंस निरस्त कर ब्लैकलिस्ट किया जाएगा तथा एफआईआर दर्ज की जाएगी।

यात्रा अवधि में प्रत्येक पशु के साथ संचालक (हॉकर) की उपस्थिति अनिवार्य होगी। बिना संचालक अथवा लावारिस पाए जाने वाले पशुओं को तत्काल कब्जे में लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रत्येक पशुस्वामी अधिकतम दो अश्ववंशीय पशुओं का संचालन कर सकेगा तथा प्रतिदिन केवल एक टोकन निर्गत किया जाएगा।

एसओपी के अनुसार सूर्यास्त के बाद तथा सूर्याेदय से पूर्व अश्ववंशीय पशुओं का संचालन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। टोकन केवल प्रातः 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक जारी किए जाएंगे। खराब मौसम, वर्षा, ओलावृष्टि अथवा बर्फबारी की स्थिति में पशुओं का संचालन रोक दिया जाएगा।

यात्रा मार्गों पर स्थायी एवं अस्थायी पशु चिकित्सालय स्थापित किए जाएंगे, जहां पशु चिकित्सकों एवं पैरावेट कर्मियों की तैनाती रहेगी। बीमार, घायल अथवा परित्यक्त पशुओं के उपचार एवं संरक्षण हेतु 24x7 इन्फर्मरी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यात्रा मार्गों पर मृत पाए जाने वाले पशुओं के शवों का वैज्ञानिक विधि से निस्तारण तथा पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।


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