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उत्तराखण्ड की डॉक्यूमेंट्री दिस ट्री वोंट फॉल ने बढ़ाया प्रदेश का मान

उत्तर नारी डेस्क 

उत्तराखण्ड की धरती से निकली पर्यावरण संरक्षण की प्रेरक कहानी अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजेगी। चिपको आंदोलन की विरासत और महिलाओं के अदम्य साहस पर आधारित डॉक्यूमेंट्री 'दिस ट्री वोंट फॉल' (This Tree Won't Fall) का चयन प्रतिष्ठित लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल के लिए हुआ है। यह उपलब्धि न केवल फिल्म निर्माण से जुड़े कलाकारों के लिए, बल्कि पूरे उत्तराखण्ड के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।

करीब चार वर्षों की मेहनत, शोध और फिल्मांकन के बाद तैयार हुई यह डॉक्यूमेंट्री चमोली जिले की 83 वर्षीय पर्यावरण संरक्षक सुदेशा देवी की संघर्षगाथा को दुनिया के सामने लाएगी। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह उन्होंने और उनके साथ की महिलाओं ने जंगलों को बचाने के लिए पेड़ों से चिपककर प्रकृति संरक्षण का ऐसा इतिहास रचा, जिसने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा।

डॉक्यूमेंट्री केवल एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि उन हिमालयी महिलाओं के संघर्ष का दस्तावेज है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी जंगलों को अपनी जीवनरेखा मानते हुए उनके संरक्षण के लिए आंदोलन खड़ा किया। फिल्म यह संदेश देती है कि पर्यावरण की रक्षा केवल प्रकृति बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी भी है।

फिल्म के लेखक दीपक रमोला का कहना है कि चिपको आंदोलन दुनिया के सबसे प्रभावशाली पर्यावरण आंदोलनों में गिना जाता है, लेकिन इसकी असली ताकत उन ग्रामीण महिलाओं का साहस था, जिनका जीवन जंगलों से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि 'दिस ट्री वोंट फॉल' के जरिए उसी संघर्ष और समर्पण को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

डॉक्यूमेंट्री की कहानी दीपक रमोला और अपूर्वा बख्शी ने लिखी है। इसका निर्माण अपूर्वा बख्शी, दीपक रमोला और मनीषा त्यागराजन ने किया है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी ध्रुव वर्मा और सिद्धार्थ गोविंदन, संपादन अजीत नायर और ध्रुव वर्मा, जबकि संगीत ताजदार जुनैद ने दिया है।

गौरतलब है कि लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल का आयोजन 19 जुलाई तक लंदन, बर्मिंघम और मैनचेस्टर में किया जा रहा है। इस प्रतिष्ठित फेस्टिवल में फिल्म का चयन उत्तराखण्ड की पर्यावरणीय विरासत और चिपको आंदोलन की ऐतिहासिक भूमिका को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। उम्मीद है कि यह डॉक्यूमेंट्री दुनिया भर के दर्शकों को पर्यावरण संरक्षण और महिला नेतृत्व की ताकत से रूबरू कराएगी।

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