उत्तर नारी डेस्क
बागेश्वर। आज के दौर में जहां बच्चे मोबाइल फोन, वीडियो गेम और दूसरी डिजिटल गतिविधियों में व्यस्त नजर आते हैं, वहीं उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के एक नन्हे छात्र ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मिसाल कायम की है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय मजकोट में कक्षा 2 में पढ़ने वाले गोलू पुरी पिछले करीब दो वर्षों से पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं।
पांच साल की उम्र से शुरू किया पर्यावरण संरक्षण का अभियान
ग्राम मजकोट, जिला बागेश्वर निवासी गोलू पुरी ने महज पांच वर्ष की उम्र में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाया। पिछले दो वर्षों से वह लगातार पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल भी कर रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि लोगों को पेड़-पौधों के महत्व के प्रति जागरूक करना भी है।
गोलू का मानना है कि पेड़-पौधे हमारे जीवन का आधार हैं और इनकी रक्षा करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उनकी यही सोच उन्हें छोटी उम्र में ही पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जोड़ रही है।
सोशल मीडिया पर ‘एनवायरमेंट हीरो’ के नाम से पहचान
गोलू पुरी के पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों को सोशल मीडिया पर भी लोगों का समर्थन और सराहना मिल रही है। उनके पौधारोपण और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े कार्यों ने बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। सोशल मीडिया पर उन्हें ‘एनवायरमेंट हीरो’ के नाम से पहचान मिल रही है।
उनके प्रयासों की खास बात यह है कि वह पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल पर भी ध्यान देते हैं। साथ ही आसपास के लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित करते हैं।
छोटी उम्र में बड़ा संदेश
गोलू पुरी की कहानी यह संदेश देती है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। यदि छोटी उम्र में ही बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराया जाए, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव रख सकते हैं।
आज जब पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है, ऐसे में गोलू जैसे बच्चों की पहल लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए प्रेरित करती है।
युवाओं और बच्चों के लिए बने प्रेरणा
गोलू पुरी का पर्यावरण के प्रति समर्पण न केवल उत्तराखंड बल्कि देशभर के बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। उनका प्रयास यह बताता है कि बड़ा बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास जरूरी हैं।
बागेश्वर के इस नन्हे ‘एनवायरमेंट हीरो’ की पहल आने वाली पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।

