उत्तर नारी डेस्क
उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (GBP-NIHE) को भारत में अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (ICIMOD) से जुड़ी गतिविधियों के समन्वय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस सहयोग के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और दिशा-निर्देशों को मंजूरी दी है।
संस्थान में बनेगा विशेष ICIMOD प्रकोष्ठ
नई व्यवस्था के तहत जीबी पंत संस्थान के मुख्यालय में एक समर्पित ICIMOD प्रकोष्ठ स्थापित किया जाएगा। यह हिमालयी राज्यों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करेगा।
परियोजनाओं की मंजूरी के लिए तीन चरणों वाली प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें पहले प्रकोष्ठ प्रस्तावों की जांच करेगा, फिर वैज्ञानिक एवं तकनीकी समिति उनका मूल्यांकन करेगी और अंतिम मंजूरी केंद्रीय पर्यावरण सचिव की अध्यक्षता वाली समिति देगी। शोध संबंधी आंकड़ों के व्यवस्थित प्रबंधन के लिए केंद्रीय डेटाबेस प्रबंधन एजेंसी (CDMA) भी बनाई जाएगी।
जलवायु परिवर्तन और हिमालयी पर्यावरण पर होगा फोकस
इस सहयोग के अंतर्गत जलवायु परिवर्तन, जल सुरक्षा, हिमनदों का अध्ययन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जैव विविधता संरक्षण, वानिकी, सतत कृषि, वायु प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया जाएगा।
जीबीपीएनआईएचई के निदेशक डॉ. आईडी भट्ट ने इस जिम्मेदारी के लिए केंद्र सरकार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि संस्थान इस पहल के माध्यम से वैज्ञानिक सहयोग, ज्ञान साझा करने और हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं, मंत्रालय की संयुक्त सचिव नमिता प्रसाद ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय और मजबूत साझेदारी जरूरी है।




