उत्तर नारी डेस्क
उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसें अब से तीसरी आंख की नजर में रहेंगी। आपको बता दें परिवहन निगम की 700 बसों में जीपीएस लगाया जा रहा है। मुख्य सचिव एसएस संधु की अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा कोष समिति की बैठक में बसों में जीपीएस लगाने को मंजूरी प्रदान की गई है। जिसके लिए प्रति बस आठ हजार रुपये के हिसाब से 56 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके साथ ही बसों पर नजर रखने के लिए परिवहन विभाग में कमांड एंड कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जा रहा है। इसका लिंक परिवहन निगम के साथ साझा किया जाएगा, ताकि निगम मुख्यालय से भी इन बसों पर सीधी नजर रखी जा सके ताकि पता चल सके की कौन सी बस किस रूट पर चल रही है।
बता दें परिवहन निगम की बसों में सुरक्षित सफर और बसों के संचालन पर नजर रखने के लिए जीपीएस लगाने की प्रक्रिया यूं तो काफी पहले से शुरू हो गई थी और इस कड़ी में परिवहन निगम ने देहरादून से लखनऊ जाने वाली बस सेवा में जीपीएस लगाया था। हालांकि, कुछ समय बाद यह व्यवस्था बंद कर दी गई थी। दरअसल, परिवहन निगम को यह शिकायत मिल रही थी कि बसें कई बार आफ रूट, यानी निर्धारित मार्ग के स्थान पर दूसरे स्थानों पर चल रही हैं। सवारी कम होने की स्थिति में निगम की बसें पूरा फेरा भी नहीं ले रही थीं। इससे निगम की छवि और आय पर काफी असर पड़ रहा था। जिसे देखते हुए परिवहन निगम की 700 बसों में जीपीएस लगाए जाने का फैसला लिया गया है। तो वहीं सचिव परिवहन डा रणजीत सिन्हा ने परिवहन निगम को इस कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
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