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उत्तराखण्ड में घटिया व अवैध दवाओं पर FSDA की सख्ती, कोडीन युक्त सिरप पर रोक

उत्तर नारी डेस्क


उत्तराखण्ड में अवैध, घटिया और दुरुपयोग की जा रही दवाओं के खिलाफ खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय टीम ने बीते सोमवार को देहरादून के मोहब्बेवाला स्थित एक दवा निर्माता कंपनी का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दवाओं की निर्माण प्रक्रिया, कच्चे माल की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था तथा अभिलेखों की गहन जांच की गई। इस दौरान सिरप समेत कई औषधियों के नमूने भी जांचे गए। जांच में कोडीन युक्त कफ सिरप में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।

गड़बड़ी सामने आने के बाद अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से उक्त कोडीन युक्त कफ सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही संबंधित औषधि के विनिर्माण का अनुज्ञापन अग्रिम आदेशों तक निलंबित कर दिया गया है।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण में यह भी सामने आया कि फर्म द्वारा निर्मित कुछ औषधियां निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर रहीं थीं, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती थीं। ऐसे में त्वरित कार्रवाई आवश्यक थी।

एफएसडीए विभाग ने स्पष्ट किया कि औषधियों के निर्माण एवं आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला होने के कारण विभाग भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रखेगा। सभी जिलों के अधिकारियों को इस संबंध में विशेष निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

प्रवर्तन के साथ-साथ न्यायिक स्तर पर भी विभाग को अहम सफलता मिली है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखण्ड के अंतर्गत जनपद नैनीताल में एनडीपीएस अधिनियम के तहत वर्ष 2019 और 2020 में दर्ज मामलों में माननीय सत्र न्यायालय ने चार अभियुक्तों को 12 वर्ष की कठोर कारावास की सजा और 1.20 लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। यह फैसला अवैध नशीली दवाओं के कारोबार में संलिप्त तत्वों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।

सचिव/आयुक्त के निर्देश पर राज्य के सभी जनपदों में औषधि अधिकारियों को कोडीन सिरप और अन्य मनःप्रभावी औषधियों के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं, निर्माण इकाइयों और वितरण नेटवर्क पर नियमित और आकस्मिक निरीक्षण तेज कर दिए गए हैं।

विभाग ने स्पष्ट किया कि अवैध दवाओं के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए निगरानी, प्रवर्तन और जन-जागरूकता—तीनों पर समान रूप से काम किया जा रहा है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर्स से ही दवाएं खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना विभाग को दें।

अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (उत्तराखण्ड) ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानक अनुरूप औषधियां उपलब्ध कराना है। औषधियों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ के समान है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



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