उत्तर नारी डेस्क
जंगलों में बाघिन के लिए अपने शावकों को बाघों की मौजूदगी में पालना किसी चुनौती से कम नहीं होता। अब इसी क्रम में तराई पश्चिमी वन प्रभाग बैलपड़ाव के जंगल में शावकों को बचाने के लिए एक बाघिन बाघ से भिड़ गई। जहां इस आपसी संघर्ष में बाघिन की अपनी जान गवानी पड़ी। आपको बता दें नवंबर से जनवरी तक का महीना बाघों का प्रजनन काल माना जाता है। इस दौरान बाघ या बाघिन के आपसी संघर्ष में मरने की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आती है।
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वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि बाघिन के साथ यदि शावक है तो वह उनके बड़े होने तक बाघ से प्रजनन नहीं करती है। ऐसी स्थिति में दूसरा बाघ बाघिन से प्रजनन करने का प्रयास करता है। वह बाघिन को अलग करने के लिए उसके शावकों पर भी हमला करता है। ऐसी दशा में बाघिन शावकों को बचाने के लिए बाघ से भिड़ जाती है। जिसमे कई बार बाघ या बाघिन के मरने की घटनाएं सामने आती हैं।
इस संबंध में डीएफओ बीएस साही बताते हैं कि बैलपड़ाव के जंगल में मृत मिली बाघिन वन विभाग के डाटा में दर्ज है। कैमरा टे्रप में उसके करीब एक साल के दो शावक दिखे थे। अपने शावकों को बचाने के प्रयास में बाघिन का बाघ से आपसी संघर्ष हुआ। जिसमें बाघिन की जान चली गई। पोस्टमार्टम में पता चला कि बाघ ने हमले के दौरान बाघिन की सांस नली पूरी तरह डैमेज कर दी थी। डीएफओ ने बताया कि मां से अलग होने के बाद शावकों पर बाघ के हमले का खतरा बना है। मृत बाघिन के शावकों को जंगल में सर्च कराया जा रहा है। साथ ही वन विभाग शावकों के संबंध में जानकारी जुटाने में जुट गया है।
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